Tuesday, 31 March 2020

A Story Of Pain (School Life)

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम धर्मेंदर साहनी है।
Hello Friends, My Name Is Dharmender Sahni.


इस कहानी मे मै आपको अपनी स्कूल लाइफ के बारे मे बताना चाहता हूं। तो सबसे पहले मेरी पढाई 1996 मे शुरू हुइ थी। पर मेरे साथ एक हादसा होने के कारण मेरा दो साल खराब हो गया था। ओर हादसे से ठीक होने के बाद मैने 1998 मे अपनी पढाई वापस शुरू की  थी।
In this story I want to tell you about my school life. So my study first started in 1996. But I had a bad two years due to an accident with me. And after recovering from the accident, I started my studies back in 1998.


Start Second Part...


My First School

क्रेसेंट पब्लिक स्कूल, जैकबपुरा गुडगाँव मे मेरी पढाई शुरू हुई ओर इस समय मै वापस 1st कक्षा  मे था। मेरी 1st से लेकर 5th तक की पढाई इसी स्कूल मे हुई थी। इस स्कूल मे  मेरे बहुत अच्छे दोस्त बने, जिनकी बहुत सारी बाते मुझे आज भी याद है। मेरे 5th क्लास मे कुल 6 ही बच्चे  थे। जिनके नाम अर्जुन, इंद्रेश, कोमल, सविता, जितेंदर ओर एक मै खुद था धर्मेंदर, हम सब ने मिलकर साल 2002 मे 5th क्लास   के बोर्ड के पेपर साथ मे  दिए थे।
My studies started at Crescent Public School, Jacobpura Gurgaon and I was back in the first grade at this time. My 1st to 5th studies were done in this school. I became very good friends in this school, whose many things I still remember. There were only 6 children in my 5th class. Whose names were Arjun, Indresh, Komal, Savita, Jitender and one myself, Dharmender, we together gave the board papers of class 5th in 2002.  

इसमें अर्जुन ओर इंद्रेश मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे। ओर एक मेरी पहली क्रश भी स्कूल मे थी। जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी जिसके कारण मै हमेशा अपने बाकी दोस्तों से लड़ाई करता रहता था। इस स्कूल मे मेरी सबसे अच्छी टीचर सुनीता मैडम  थी।  जो की स्कूल की प्रिंसिपल भी थी। और दूसरी अच्छी टीचर तमना मैडम थी। इसके अलावा कान्ता मैडम, वीणा मैडम, ज्योति मैडम, मुझे बहुत लगते थे। 
In this Arjun and Indresh were my Best friends. And my first crush was also in school. Which I loved very much, because of which I always kept fighting with the rest of my friends. My best teacher in this school was Sunita Madam. she was also the principal of the school. And the other good teacher was Tamna Madam. Also Kanta Madam, Veena Madam, Jyoti Madam, I used to think a lot.

Some information.
(ओर  साल 1998 से 2002 के बीच मे  हम कुछ साल जैकबपुरा मे  रेंट पर रहे। पर इसी बीच मे  हम पटेल नगर किराये पर वापस आ गए थे।)
(And we stayed in Jacobpura for a few years between 1998 and 2002. But in the meantime, we were back on Patel Nagar rental.)

My Second School

नीरज पब्लिक स्कूल ये स्कूल पटेल नगर गुडगाँव मे है। यहाँ मेरी 6th क्लास  से 8th  तक की पढाई यही पर हुई थी. साल 2005 मे  मैने 8th क्लास के बोर्ड के पेपर इसी  स्कूल से दिए थे।  इस स्कूल मे भी मेरे कई दोस्त बने उनमे से रणजीत मेरा बहुत अच्छा दोस्त था।  इसके अलावा ओर कोई भी मेरा अच्छा दोस्त  नहीं बन पाया। इस स्कूल मे मेरी सबसे अच्छी टीचर दीपा मैडम और ज्योति मैडम थी।
 Neeraj Public School This school is in Patel Nagar Gurgaon. Here I had studied from class VI to VIII here. In the year 2005, I gave the board papers of class VIII from this school. Many of my friends became friends in this school too, out of which Ranjit was a very good friend of mine. Apart from this, nobody could become my good friend. My best teachers in this school were Deepa Madam and Jyoti Madam.

My Third School

डी.ए.वी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, ये स्कूल खांडसा रोड गुडगाँव में है। इस स्कूल मे मैने साल 2006 मे 9th क्लास पास की, साल 2007 मे 10th क्लास के बोर्ड के पेपर दिए, साल 2008 मे 11th पास किया था। ओर 2009 मे 12th पढाई पूरी नहीं कर पाया था।  क्यूंकि मेरे स्कूल में मेरा फ्रेंड सर्कल सही नहीं होने के कारण मैंने स्कूल से काफी ज्यादा छूटी की थी।  जिसके कारण  मेरा स्कूल से नाम काट दिया गया था।
DAV Senior Secondary School, this school is in Khandsa Road, Gurgaon. In this school, I passed the 9th class in the year 2006, in the year 2007, I gave the 10th class board papers, in the year 2008 I had passed the 11th. And could not complete 12th studies in 2009. Because I missed school a lot because my friend circle was not right in my school. Because of which my name was dropped from school.
मैने स्कूल मे नाम लिखवाने की बहुत कोशिश की थी। स्कूल मे वापस नाम लिखवाने के लिए मैने नकली पेरेंट्स बना कर भी स्कूल ले गया था। पर इससे कोई फायदा नहीं हुआ। जिसके कारण मुझे अपनी 12th कक्षा की पढाई आधे मे ही छोड़ के नैशनल ओपन बोर्ड में एड्मिशन लेना पड़ा, ओर ओपन बोर्ड से ही 2009 मे  मैने पेपर देकर 12th पास की थी।
I tried a lot to enroll in school. I had even taken fake parents to school to enroll their names back in school. But to no avail. Due to which I had to leave my 12th class studies in half and take admission in the National Open Board, and in 2009 I passed the 12th from the open board by giving papers.
 

इस स्कूल मे भी मेरे काफी अछे दोस्त बने थे। जिसमे से मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त था। जिसका नाम तेजपाल था। जो आज भी मेरा बहुत अच्छा दोस्त है। और इस स्कूल मे  मेरे सबसे अच्छे टीचर संतोष कुमार सर ओर भिष्म सिंह सर थे। 
I also had very good friends in this school. Of which I had a very good friend. Whose name was Tejpal. Who is still a very good friend of mine. And my best teacher in this school was Santosh Kumar Sir and Bhishma Singh Sir. 




A Story Of Pain Next Parts..
  • बचपन लाइफ 
  • Childhood Life
  • कॉलेज लाइफ
  • Collage Life 
  • लव लाइफ
  • Love Life
  • जॉब लाइफ
  • Job Life  
  • फर्स्ट मैरिज
  • First Marrige  
  • सैकंड मैरिज
  • Second Marrige   
  • बिज़नेस लाइफ
  • Business Life 
  • थर्ड मैरिज
  • Third Marrige
  • पुलिस केस
  • Police Case 
  • बिज़नेस लाइफ लोस एक करोड़
  • Business Life Loss 10 Million 
  • डिप्रेशन लाइफ
  • Depression Life 
  • माय वेलविशर माय फ्रेंड 
  • My Wellwisher My Friend
  • बिज़नेस लाइफ अगेन एंड प्रॉफिट एक करोड़+
  • Business Life Again and Profit 10 million +


      





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