Thursday, 2 April 2020

A Dad Killed Son (Real Life Story)

एक पिता ने बेटे को मार डाला (वास्तविक जीवन की कहानी)
A Dad Killed Son (Real Life Story)
2003

हेलो दोस्तो, मेरा नाम धर्मेंदर साहनी है।  
Hello Friends, My Name Is Dharmender Sahni.

आज मै  आपको लेके चलता हूं साल 2003 में जहा एक पिता ने अपने बड़े बेटे की पत्नी के साथ नाजायज़ सम्बन्ध बनाने के लिए अपने बेटे को जान से मार दिया। ये कहानी बिल्कुल सच्ची घटनाओं पर आधारित है।
Today I will take you with me in the year 2003 where a father killed his son for having an illegal relationship with his elder son's wife. This story is based on true events.
साल 2003 की बात है।  बिहार राज्य मे मधुबनी जिले के सुर्याही गांव मे एक परिवार रहता था। परिवार के मुखिया का नाम राजेन्दर प्रसाद था। जिसके 7 बेटे और 1 बेटी थी। परिवार की आर्थिक व्यवस्था अच्छी थी। जिसके करण परिवार का गुजारा अच्छे से चल जाता था।
The year was 2003. A family lived in Suryahi village of Madhubani district in the state of Bihar. The name of the head of the family was Rajendra Prasad. He had 7 sons and 1 daughter. The family's financial system was good. Due to which the family was well maintained.
  
साल 2002 में राजेन्दर प्रसाद ने अपने बड़े बेटे लाल बाबू की शादी  किसनी पटी गांव बिहार मे बहुत अच्छे से की थी। समाज के सारे नियम के साथ ओर सारे रीती रिवाजो का पालन करके शादी हुई  थी। शादी के कुछ महीनो तक सब कुछ बहुत अच्छे से चला परिवार के सभी लोग बहुत खुश थे। जैसे जैसे समय बीतता गया परिवार में कुछ आर्थिक परेशानिया शुरू हो गयी परिवार की आर्थिक समस्या को देखते हुए लाल बाबू ने, पैसो की जरुरत के कारण पंजाब जाके काम करने के बारे में सोचा। शादी से पहले भी लाल बाबू कई बार पंजाब काम करने के लिए जा चूका था।
In the year 2002, Rajendra Prasad married his elder son Lal Babu in Kisani Pati village Bihar very well. Married following all the rules of society and following all customs. Everything went very well until a few months after the wedding, all the family members were very happy. As time went on, some financial problems started in the family. Looking at the financial problems of the family, Lal Babu thought of going to Punjab due to need of money. Even before marriage, Lal Babu had gone to Punjab to work many times.

 शादी के लगभग 3 महीने ही बीते थे लालबाबू काम के लिए पंजाब चला गया। कुछ समय बीत  गया राजेंदर प्रसाद गांव में रहकर ही अपना खर्चा चलाता  था।  राजेंदर प्रसाद के बाकि बेटो को परिवार से कोई खास मतलब नहीं रहता था। शहर में काम करने के कुछ महीनो बाद लालबाबू शहर से वापस आ गया।  उसके शहर से वापस आने के बाद  दोनों पति पतनी में रोज़ रोज़ लड़ाई होने लगी छोटी छोटी बातो पर एक दूसरे से नाराज होने लगे ।
  About 3 months after marriage, Lalbabu went to Punjab for work. After some time Rajender Prasad used to spend his expenses only by staying in the village. The other sons of Rajendra Prasad did not mean much to the family. A few months after working in the city, Lalbabu returned from the city. After her return from the city, both the husband wife started getting angry with each other over small things that started fighting every day.

लालबाबू की अपने पिता के साथ भी पैसो को लेकर झगड़े होने शुरू हो गये। लालबाबू ओर राजेंदर प्रसाद के बिच बात इतनी बढ़ गयी की परिवार से अलग होने की बात शुरू हो गयी।  लालबाबू  इन झगड़ो से परेशान होके  एक दिन अपनी पत्नी के साथ वापस शहर जाने का फैशला कर लिया। लालबाबू की पत्नी ने शहर ना जाके गांव में ही अलग होकर रहने के लिए कहा।  पर लालबाबू ने अपनी पत्नी की कोई भी बात नहीं मानी।
Lalbabu's quarrels with his father also started with money. The talk between Lalbabu and Rajender Prasad increased so much that the talk of separation from the family started. Lalbabu, troubled by these quarrels, decided to go back to the city with his wife one day. Lalbabu's wife asked not to leave the city and stay in the village. But Lalbabu did not listen to his wife. 
 ओर एक दिन रेलवे स्टेशन जाके अपनी और अपनी बीवी की पंजाब जाने की टिकट ले आया। और शहर जाने की तयारी करने लगा।  लालबाबू को किसी भी तरह का कोई अंदाज़ा नहीं था की उसके पीठ पीछे क्या हो रहा था और उसके साथ क्या होने वाला था।
  And one day he went to the railway station and brought his and his wife's ticket to Punjab. And started preparing to go to the city. Lalbabu had no idea what was happening behind his back and what was going to happen to him.

शहर जाने से एक दिन पहले जब रात के समय लालबाबू खाना खा के रोज़ की तरह सोने के लिए चला गया।
  One day before going to the city, Lalbabu went to sleep as usual after having dinner.

काली रात
Black Night
 लालबाबू रात को सो रहा था।  कुछ देर बाद घर का काम खतम करके उसकी बीवी भी सोने के लिए आ गयी। समय लगभग रात के 11 :30 हो रहे थे। जब उसकी बीवी सोने के लिए आयी तो लालबाबू गहरी नींद मे  सो रहा था।  उसकी बीवी का शहर जाने का बिलकुल भी मन नहीं था।
Lalbabu was sleeping at night. After some time, after finishing the housework, his wife also came to sleep. The time was almost getting past 11:30. When his wife came to sleep, Lalbabu was fast asleep. His wife did not mind going to the city at all.

अचनाक कुछ देर बाद राजेंदर प्रसाद उनके कमरे में आ गया। उसके हाथ में एक बैग था ओर उसमे कुछ हथ्यार थे जैसे की कुल्हाड़ी चाकू तलवार आदि ओर इन सब बातो का पता लालबाबू की बीवी को पहले से था। दोनों ने मिलकर पहले से ही सारी योजना बना रखी थी।  उन दोनों ने मिलकर लालबाबू को जान से मारने का विचार बना रखा था। 
After a while, Rajender Prasad comes to his room. He had a bag in his hand and some weapons in it like axe knife, sword etc. And all these things were already known to Lalbabu's wife. Together, the two had already made all the plans. Together, both of them had the idea of ​​killing Lalbabu.

गहरी नींद में सो रहे लालबाबू  को उसके पिता ने जान से मारने के लिए सबसे पहला वार तलवार से गले पर किया। तलवार लगते ही लालबाबू  आधे कटे हुए गर्दन के साथ तड़पने लगा, गहरी नींद में होने के कारण  लालबाबू को कुछ भी पता नहीं लगा।
In order to kill Lalbabu, who was sleeping deeply, his father first stabbed him with a sword on his neck. As soon as the sword struck, Lalbabu started to suffer with half-cut neck, being in deep sleep, Lalbabu did not know anything.

तड़पते हुए लालबाबू को उसके पिता ने धीरे धीरे उसके शरीर के 100 से ज्यादा टुकड़े करके एक बैग में भर लिया । और उसी घर में 10 फ़ीट निचे गढा करके दफना दिया।  कमरे में जहा जहा भी खून के निशान थे सारे निशान रात भर में ही साफ़ कर दिए। मिटटी ओर  घास फूस के घर होने के कारण  लाश को तफनाने में और घर को साफ़ करने में उनको ज्यादा समय नहीं लगा रात भर में ही दोनों ने मिलकर सारा घर साफ़ कर दिया और सुबह होने से पहले दोनों अलग अलग हो गए।
While suffering, Lalbabu slowly stuffed more than 100 pieces of his body into a bag. And buried 10 feet down in the same house. Wherever there were marks of blood in the room, all the marks were cleared overnight. Due to the soil and grass pallet house, it did not take much time for them to tamp the corpse and clean the house, in the night, together they cleaned the whole house and before dawn they both separated.  


अगले दिन सुबह। ........Next Day Morning.......

Second Part

  

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